Why this blog?

नमस्कार दोस्तों!

मेरा ब्लॉग पढ़ने के लिए धन्यवाद! मेरा नाम आशीष सक्सेना है और मैं एक science scholar, एक computer geek, एक gadgets freak, एक automobile enthusiast, एक infopreneur, एक teacher और एक aspiring entrepreneur हूँ | मैं काफी कुछ आप ही लोगों की तरह हूँ| मुझे पढ़ना, लिखना, मोटरसाइकिल चलाना, नए व्यंजन try करना, movies देखना, अपनी बेटी के साथ कार्टून्स देखना, नयी नयी जगह घूमने जाना, अपनी पत्नी के साथ बातें करना, और हाँ, सपने देखना, बहुत अच्छा लगता है |

क्या मैंने कहा “सपने”? हाँ, सपने| हम दोनों (मैं और मेरी श्रीमती) के कई सपने हैं, जिन्हें हम पूरा करने की इच्छा रखते हैं| मैं कई तरह की वस्तुओं के बारे में सपने देखता हूँ जो मुझे ख़ुशी प्रदान करती है, मेरे चेहरे पर मुस्कराहट लाती है, जीवन में संतुष्टि लाती है, और मानसिक शांति प्रदान करती है |

The Blog!

जिंदगी के कई पडाव में, काफी बार मुझे लगा की अब मैं हार गया हूँ | नौकरी, जिंदगी, परिवार, काम ऐसे सभी पहलू थे जिन्मे ये समय आया | उस समय, मेरी पत्नी, मेरा परिवार, मेरे (और हमारे) सपने, और सबसे ऊपर मेरा self-motivation मेरे साथ खड़ा रहा, और मुझे हार मानने से बचाता रहा | इसके अलावा मैं बहुत strict believer हूँ कि, दुनिया की सबसे बड़ी demotivator होती है “रात्रि” यानी night | कैसे? आज आप बहुत motivated हैं, आप सोए, सुबह सोकर उठे, और सारा motivation गायब | सारा motivation ख़त्म | वह “प्रत्येक सुबह” जिंदगी की एक बहुत बड़ी चुनौती है | और वह चुनौती क्या है? अपने आप को पुनः नियंत्रण में लाना और motivated रहना |

एक बात और मैंने हमेशा गौर की है, कि आज की नयी generation काफी practical है, मगर साथ साथ उनका confidence काफी कम है, वे पथभ्रष्ट (misguided) हैं, और उन्हें अपनी जिंदगी का पाथ भी स्पष्ट नहीं है | ऐसा सभी नवयुवकों के साथ नहीं है मगर, च्यूंकि मैं एक teacher हूँ, ऐसे students मेरे संज्ञान में आते ही रहते है | उनको सही guidance, motivation और प्रेरणा की ज़रूरत है जिससे कि वो एक deterministic, goal oriented जिंदगी को सही दिशा में जी सकें और नकारात्मकता को पीछे छोड़कर सकारात्मकता के साथ कदम आगे बढाएं और अपनी ज़िन्दगी में कुछ achieve कर सकें | और इसके अलावा, जैसा की मैंने ऊपर लिखा, हम बड़ों को भी कभी कभी motivation की ज़रूरत होती है |

मैं असल ज़िन्दगी में एक teacher हूँ और मेरी ज़िन्दगी का सिद्धांत अपनी क्षमता अपनी काबिलियत और अपनी योग्यता में दूसरों की मदद करना और उन्हें सही guidance देना है | मैं हमेशा कोशिश करते रहता हूँ students को motivate करने की, जिससे की वे अपनी ज़िन्दगी के लिए नए रास्ते खोल सकें, कभी पथभ्रष्ट न हों, और वो वह सब पाने की कोशिश कर सकें जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा हो या चाहा हो | और इस सबसे ज़रूरी है कि वो ज़िन्दगी में कभी भी हार ना माने |

और हाँ, मैं ऐसा कैसे कर पा रहा हूँ? याद रखिये, मैंने कभी हार नहीं मानी | और मेरे (हमारे) सपने? इसीलिए ये blog |

इस blog में मैं positive stories, positive quotes, success stories, और अपनी जिंदगी में आगे कैसे बढें और कैसे अपने पैरों पर खुद खड़े हों ऐसी ही जानकारियां share करता हूँ | आशा करता हूँ आप मेरा blog पसंद करेंगे, मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे और मेरा साथ देंगे |

TodayIGiveUp.com – The Name!

कई लोगों ने मुझसे पूछा कि, जबकि यह blog positive बातों के बारे में है, फिर भी इसका title इतना not-so-positive क्यूँ है? Title कहता है कि “आज आपने हार मान ली” जबकि blog positive stuff और money making के बारे में है | इस सवाल का ज़बाब देने के लिए मैंने सोचा की इसका जबाब मैं अपने blog के introductory part में ही डाल दूं |

संसार हर जगह negativity से भरा हुआ है | एक आदमी कार से टकरा कर, सड़क पर घायल पड़ा है, कोई अपनी गाडी रोक कर उसे मदद देने की कोशिश नहीं करता | लोग अपनी कार की सीट की फिक्र पहले करते हैं, कि सीट खून से गंदी हो जाएगी | या छोड़ो कौन चक्कर में पड़ेगा, मुझे office के लिए late हो रही है, या मेरा ज़रूरी काम छूट जायेगा | बस सीट खून से गंदी नहीं होनी चाहिए, office के लिए देर नहीं होनी चाहिए, भले ही कोई आदमी आपनी ज़िन्दगी से मुक्त हो जाये | एक लड़की के पीछे चाक़ू लेकर कुछ लोग पड़े हैं, वह भाग रही है, चीख रही है, मदद के लिए पुकार रही है, लोग इकठ्ठे होकर उसको बचाने की बजाय mobile से विडियो बनाते हैं, या अपनी जान बचा कर भाग उठते हैं | लोग आजकल दूसरों के बारे में नहीं सोचते | “मैं”, यह शब्द उनकी ज़िन्दगी बन चुका है | Self-mindedness उनके व्यक्तित्व का मुख्य बिंदु बन चुका है | अगर blog का title कुछ positive-stuff या कुछ अच्छे समाचार आदि होता, तो क्या वह लोग कुछ परवाह करते? वह तुरंत उसे नज़रंदाज़ कर देते |

सामान्यतः मनुष्य, कम positive (सकारात्मक) बात की तरफ प्राकृतिक रूप से आकर्षित होते हैं | इसी बात का लाभ उठाने के लिए और साबित करने के लिए कि एक not-so-positive title रखने से web-blog का content प्रभावित नहीं होता है, मैंने यह title का चुनाव किया |

Language of the blog!

लोग मुझसे यह सवाल भी करते हैं कि, blog के content की भाषा हिंगलिश (अर्थात आधी हिंदी और आधी english) क्यूँ है? इसका कारण है कि, हम लोग रोजाना बोलचाल में, कई english के शब्द प्रयोग करते हैं, जिनको, अगर शुद्ध हिंदी में बोला जाये, तो बड़ा अटपटा लगेगा | जैसे मैंने एक शब्द ऊपर प्रयोग किया, “deterministic” इसकी शुद्ध हिंदी है, “नियतात्मक” या “निश्चयात्मक” | अब आप समझ ही गए होंगे! और हकीकत बताऊँ, तो मैं english medium स्कूल से पड़ा हूँ, और इतनी हिंदी मुझे आती भी नहीं है | अब हर शब्द के Translation के लिए अगर गूगल translate पर जाऊं तो काफी समय लगेगा | इससे अच्छा है कि, common बोलचाल की भाषा प्रयोग की जाये, जो मुझे लिखने और बोलने में आसानी हो, और आपको समझने में भी | है ना पते की बात?